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वहमी लेखक

सूरज प्रकाश
सूरज प्रकाश

• टूमैन कपोते अपना कोई भी काम शुक्रवार को शुरू नहीं कर पाते थे। यहां तक कि अगर उनके होटल के कमरे का नंबर 13 हो तो वे कमरा बदल लेते थे। वे ऐशट्रे में सिगरेट के तीन टोटों से ज्‍यादा कभी नहीं छोड़ते थे। अगर टोटे ज्‍यादा हो जायें तो अपने कोट की जेब में ठूंस लेते। वे पीले कागज पर लिखते थे।

• हैंस क्रिश्‍चियन एंडरसन जब होटलों में ठहरते तो अपने साथ लंबी रस्‍सी ले कर जाते थे ताकि अगर कभी आग लग जाये तो उन्‍हें निकल भागने में आसानी हो।

• लेखक डी एच लारेंस नंगे बदन शहतूत के पेड़ों पर चढ़ जाया करते थे। इससे उनकी कल्‍पना शक्‍ति को पंख लग जाते थे।

• अलेक्जेंडर ड्यूमा हर विधा के लिए अलग रंग के कागज इस्‍तेमाल करते थे। कागज का रंग बदलने से उन्‍हें लगता था कि उपन्‍यास के स्‍तर में फर्क आ गया है। वे अपना सारा लेखन घर की भागदौड़ के काम काज निपटाने और भोजन करने के बीच करते थे।

• सुप्रसिद्ध जेम्स बॉंड सीरीज़ के लेखक इयान फ्लेमिंग सोने के टाइप राइटर पर अपने उपन्‍यास टाइप करते थे।

• एडगर एलन पो अपने फाइनल ड्राफ्ट अलग अलग कागजों पर तैयार करते और बाद में उन्‍हें एक लंबे रोल के रूप में चिपका देते। उनके पास कैटरीना नाम की एक प्‍यारी सी बिल्‍ली थी। वे उसे अपनी साहित्यिक गुरू मानते थे। जब बिल्‍ली अंगड़ाई लेती तो जनाब पो मान लेते कि मेरे शब्‍द बिल्‍ली मैडम ने एप्रूव कर दिये हैं।

• लेखक कुर्ट वोनेगट लिखने से पहले दंड बैठक लगाते थे।

• गैब्रियल गार्सिया मार्केज के लिखने की आदतें बेहद दिलचस्प थीं। उन्होंने हमेशा टाइपराइटर पर लिखा। वे सिर्फ दो उंगलियों से टाइप करते थे। दोनों हाथों की तर्जनी से। अगर उनकी मेज पर पीला गुलाब न हो, तो वे लिख नहीं पाते थे। वह अपने लिखे हुए को शब्दों में नहीं मापते थे, बल्कि मीटर में मापते थे, क्योंकि शुरुआती दिनों में वह कागज की लंबी रिम पर लिखा करते थे।

• ज्यां पॉल सार्त्र की लिखने की बड़ी विचित्र शैली थी। औरों की तरह वे भी हाथ से लिखते थे लेकिन जब लिखते लिखते थक जाते तो पैरों से लिखना शुरू कर देते।

• धर्मवीर भारती जब खाने के प्रति लापरवाह होने लगें और चाय ज्‍यादा मांगने लगें तो पुष्‍पा जी समझ जाती थीं कि कोई रचना बाहर आने को है।

• राही मासूम रज़ा अपने घर पर ही, बच्‍चों के शोर शराबे के बीच ही लिख पाते थे। संगीत बज रहा हो, बच्‍चे खेल रहे हों, सब जन आपस में बात भी कर रहे हों और खूब धूम धड़ाका हो घर में तो ये उनके लिखने के लिए सही माहौल होता था।

• वैलस स्‍टीवेंस चलते चलते कागज की पर्चियों पर कविता लिखा करते थे। इस तरह से वे प्रेरणा पाते थे। बाद में ये पर्चियां सेक्रेटरी को टाइप करने के लिए दे दी जातीं।

• क़ैफ़ी आज़मी जब ठीक ठाक कमाने लगे तो मो ब्‍लांक पैन से लिखते थे। उनके पास इस कंपनी के 15 पैन थे।• चार्ल्‍स डिकेंस को नीली स्‍याही से मोह था। इसके पीछे कोई वहम नहीं था। उनका ये मानना था कि नीली स्‍याही जल्‍दी सूखती है।

• रूसी साहित्यकार चेखव को घड़ी सामने रखकर लिखने की आदत थी। हर वाक्य की समाप्ति पर उनकी निगाह घड़ी पर होती थी।

• अमरीकी लेखक जॉन शीवर ने बहुत सी कहानियाँ केवल अंडरवियर पहने हुए लिखी थीं। उन दिनों उनके पास एक ही सूट हुआ करता था इसलिए उसे बार बार पहन कर उस पर झुर्रियां और शिकन ला कर उसे खराब करने में वे विश्‍वास नहीं रखते थे।

• जॉन स्‍टेनबैक अपनी रचनाओं के ड्राफ्ट पैंसिल से तैयार करते थे। उनकी मेज पर बेहतरीन तरीके से शॉर्प की गयी गिन कर बारह पैंसिलें रखी रहतीं।

• बाल्जाक लिखते समय अपनी बगल में जलता दीप रखते थे। दोपहर की तीखी रौशनी में भी उनकी बगल में दीप जलता रहता। मजे की बात, पायजामा और ड्रेसिंग गाउन पहनकर ही उन्हें लिखने की प्रेरणा मिलती थी।

• लेखक विजयदान देथा बिज्‍जी अक्सर हरे रंग के काग़ज़ पर हरी स्‍याही से लिखते थे। वे हमेशा मोटी निब वाले फाउंटेन-पेन से अक्षर जमा-जमा कर लिखने में ही आनंद अनुभव करते थे।

• रांगेय राघव अपने सारे काम व्‍यवस्‍थित रूप से करते थे। यहां तक कि लिखने के लिए स्‍याही भी खुद ही बनाते थे। वे पैर में रस्‍सी बांध कर पंखा चलाते रहते और खूब सिगरेट पीते हुए लिखा करते थे।

• थॉमस वुल्‍फ पैंसिल से पीले कागजों पर लिखते थे।

• कवयित्री एमी लोवेल मर्दाने सूट और कमीजें पहन कर लिखती थीं।

• चार्ल्स डिकेंस अपने साथ हमेशा एक कम्पास रखते थे। उनका यह दृढ़ विश्वास था कि यदि वह उत्तर दिशा में सिर रखकर नहीं सोएंगे तो उन्हें मौत उठा ले जाएगी।

• फ्रेडरिक शिल्‍लर अपनी मेज की दराज में सड़े हुए सेब रखते थे। सड़े हुए सेबों की तीखी गंध ही उनके जीवन और लेखन की प्रेरणा स्रोत थी।

• फ्लैनेरी ओ’कोनोर महोदया ने अपने घर में ही मुर्गी खाना बना रखा था जिसमें मुर्गे, बत्‍तखें, चूजे वगैरह भरे रहते। उनका एक मुर्गा तो उलटे चलने में माहिर था।

• लियो टॉलस्टाय को न जाने कैसे वहम हो गया था कि वे पक्षियों की तरह हवा में उड़ सकते हैं। उनकी इस अजीब सनक का यह हाल था कि एक दिन उन्होंने अपने दुमंजिले मकान की खिड़की से पक्षियों की तरह हाथ फड़फड़ाते हुए छलांग लगा दी। हाथ पैर टूटने ही थे।

• सामरसेट लिखते समय वे सदैव अपने पास एक ताबीज रखते थे ताकि दुष्ट प्रकृति वाली वस्तुओं का उनके मस्तिष्क पर प्रभाव न पड़े।

सूरज प्रकाश की किताब लेखकों की दुनिया में से

Pawan Toon Cartoon

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