यूक्रेन के शहरों की रसद लाइन क्यों काटना चाहता है रूस

यूक्रेन के शहरों की रसद लाइन क्यों काटना चाहता है रूस ?

यूक्रेन (RussiaUkraineConflict) युद्ध के दलदल में अब रूस खुद फसता नज़र आ रहा है। शुरूआती दिनों में ऐसा लग रहा था कि रुसी सेना बड़ी तेजी से यूक्रेन के अंदर प्रवेश कर वहां पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लेगी। और, यूक्रेन आसानी से रूस के समक्ष आत्मसमर्पण कर देगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। यूक्रेन के शहरों के अंदरूनी हिस्सों में रूसी सैनिकों को कठिन विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आज युद्ध के छठे दिन हो चुके हैं। लेकिन रूस किसी भी यूक्रेनी शहर पर पूर्ण रूप से कब्जा नहीं कर पाया है।

रुसी सेना (RussiaUkraineConflict) ने किया रणनीति में बदलाव


खबर है कि रुसी सेना ने यूक्रेन के शहरों को लेकर अपने रणनीति में बदलाव किया है। शहर के अंदर प्रवेश कर उस कब्जा करने के बजाए उसकी बाहरी घेरा बंदी करने पर जोर दे रही है। अगर योजनाबद्ध तरीके से शहरों की बाहरी घेराबंदी हो जाती है तो रसद लाइन को बाधित करना रूस के लिए आसान हो जायेगा। यानी ऐसे शहरों तक खाना, पानी और अन्य ज़रूरी सामान पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। यूक्रेन के नागरिकों द्वारा हथियार उठा लेने के बाद रूस ने यह नीति अपनाई है।


 
यूक्रेन के नागरिकों में एकजुटता कायम

यूक्रेन में बड़ी तादात में रुसी भाषा बोलने वाले यूक्रेनी नागरिक रहते है। साथ ही यहां यूक्रेन के मूल नागरिक भी है। रुसी आक्रमण के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि कही यूक्रेन रूस से युद्ध (RussiaUkraineConflict) के दौरान ही गृह-युद्ध की भी चपेट में न आ जाए। क्योंकि रूस यूक्रेन के अलगाववादियों को हमेशा प्रोत्साहित करता रहता है इसलिए ऐसी सम्भावना दिख रही थी कि युद्ध के दौरान यूक्रेन के रुसी भाषा बोलने वाले यूक्रेनी नागरिक वहां के मूल नागरिकों के खिलाफ बगावत कर सकते है और इस प्रकार रूस से युद्ध के दौरान ही यूक्रेन गृह-युद्ध की चपेट में आ जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रूस के साथ युद्ध के मसले पर यूक्रेन के सभी नागरिक एकजुट दिखाई दे रहे हैं जिससे वहां की सेना का मनोबल बढ़ा ही है।

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Cartoonist Ifran

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