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जदयू के टिकट से BJP के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली वृंदा थौनाओजम कौन हैं?

जदयू के टिकट से BJP के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली वृंदा थौनाओजम कौन हैं?
जदयू के टिकट से BJP के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली वृंदा थौनाओजम कौन हैं?

Thinkerbabu न्यूज़ डेस्क से
03 फरवरी 2022

दिल्ली, इन दिनों मीडिया में मणिपुर की ‘लेडी सिंघम’ वृंदा थौनाओजम (Manipur Elections IPS Thounaojam Brind) की चर्चा बड़े ही जोर शोर से हो रही है। दरअसल, मणिपुर की तेज तर्रार आईपीएस ऑफिसर वृंदा अपनी नौकरी छोड़कर जदयू की टिकट से BJP के खिलाफ चुनाव (Manipur Assembly Election) लड़ने का फैसला किया है।

मणिपुर (Manipur Assembly Election) में 5 मार्च को दूसरे चरण का मतदान होना है। राज्य के दूसरे चरण के चुनाव में इस बार यास्कुल विधानसभा सीट की काफी चर्चा है। इस सीट से वृंदा थौनाओजम जेडीयू प्रत्याशी (Manipur Elections IPS Thounaojam Brind) के रूप में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही है।

 43 साल की वृंदा थौनाओजम की छवि एक तेज तर्रार और ईमानदार आईपीएस अधिकारी की हैं। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में एंट्री की है।

 ड्रग रैकेट का पर्दाफाश कर चर्चित हुई थी वृंदा

 एक ड्रग रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए वृंदा की अक्सर चर्चा होती है क्योंकि उन्होंने इस ऑपरेशन में साहस और ईमानदारी का परिचय दिया था। बगैर किसी राजनीतिक दबाव में आए काम करते रहने के कारण वृंदा का अपने कार्यकाल के दौरान अक्सर सत्ता के साथ टकराव होता रहता था। उन्होंने जिस ड्रग्स रैकेट का पर्दाफ़ाश किया उसमें सत्ता से जुड़े कई लोगों का नाम शामिल है। वृंदा के ऊपर उन्हें छोड़ने का राजनीतिक दबाव भी डाला गया। इन्होंने जिसको गिरफ्तार किया उसका सम्पर्क मुख्यमंत्री से भी बताया जाता है। लेकिन इन्होंने बगैर किसी दबाव के काम किया। इसके बाद राज्य में इनकी लोकप्रियता बढ़ गयी।

“वीरता पुरस्कार” को लौटा चुकी हैं वृंदा

मणिपुर की लेडी सिंघम वृंदा को उनके साहसिक काम के लिए राज्य सरकार द्वारा वीरता पुरस्कार से नवाजा गया था। लेकिन जब इन्होंने ड्रग्स रैकेट के आरोपियों को गिरफ्तार किया तो उसे बाद में अदालत द्वारा रिहा कर दिया गया। इससे नाराज हो कर वृंदा ने वीरता पुरस्कार को लौटा दिया था।

मणिपुर के CM पर लगाया था वृंदा ने आरोप

वृंदा थौनाओजम ने ड्रग्स रैकेट मामले में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर भी अभियुक्तों से मिलीभगत का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री आरोपियों के पक्ष में दबाव बनाना चाहते हैं।

जानिए! विवादों से वृंदा का पुराना नाता क्यों है?

हालांकि वृंदा का विवादों से पुराना नाता है। इनके ससुर ने राज्य में एक सशस्त्र आंदोलन का संचालन किया था। यह आंदोलन अलगाववाद से मिलता जुलता था। इसके कारण भी वृंदा पर कई तरह के आरोप लगते रहे, वो आलोचना की शिकार होती रहीं।

 मणिपुर की मीडिया में अक्सर छाई रहने वाली वृंदा थौनाओजम के पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वृंदा तीन बच्चों की मां भी हैं। सोशल मीडिया पर इनकी बड़ी संख्या में ‘फैन फॉलोइंग’ है। राज्य के यूथ में इनकी अक्सर चर्चा होती रहती है।

5 मार्च को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में वृंदा जेडीयू के टिकट पर यास्कुल विधानसभा सीट (Manipur Elections IPS Thounaojam Brind) से चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर उनका मुकाबला बीजेपी के मौजूदा विधायक और मणिपुर के वर्तमान कानून मंत्री थोकचोम सत्यब्रत सिंह से है। इस बार जेडीयू मणिपुर में अकेले चुनाव लड़ रही है। यहां भाजपा के साथ उसका गठबंधन नहीं है।

IPS की नौकरी छोड़ राजनीति में आने का निर्णय क्यों लिया वृंदा ने?

अपने चुनाव प्रचार के दौरान वृंदा बेबाकी से अपने विचारों को रखती हैं। उनकी नज़र में नशाखोरी राज्य की सबसे बडी समस्या है जिसके कारण युवा रास्ते भटक जाते हैं, कानून व्यवस्था के मुख्य धारा से अलग हो जाते हैं। इसलिए वो कहती है कि उनके राजनीति में आने का मुख्य मकसद मणिपुर को नशे से मुक्ति दिलाना हैं।

अभी तक मणिपुर की राजनीति में महिला उम्मीदवारों की संख्या बहुत कम रही है। वृंदा इस बात की भी चर्चा करती हैं कि देश के दूसरे हिस्से की तुलना में यहां की राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी और सक्रियता बहुत कम क्यों है? अगर वो चुनाव जीतती हैं तो राज्य में स्थापित पुरुष प्रधान राजनीति का ट्रेंड भी बदल जाएगा।

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