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यूक्रेन-रूस विवाद पर भारतीय नीति पर क्या कहता है रूस ?

रूस भारत का मित्र राष्ट्र रहा है। आजादी के बाद से ही रूस और भारत में मित्रता रही है। अमेरिका के साथ भारत के संबंध में उतार चढ़ाव होता रहा है लेकिन रूस के प्रति तो सदैव मित्रपूर्ण व्यवहार ही रहा है। यूक्रेन के साथ भी कभी भी भारत का कोई मतभेद नहीं रहा है। ऐसे में निश्चित तौर पर भारत के लिए यूक्रेन-रूस विवाद में किसी एक पक्ष का साथ देना कठिन होता।

निश्चित रूप से भारत के लिए एक दुविधा और संयम का समय है। इसलिए यहां की सरकार दुनिया के दूसरे देशों की नीति पर भी नजर रखे हुए है। यह सोचना भी बहुत महत्व पूर्ण है कि चीन और पाकिस्तान रूस यूक्रेन विवाद पर क्या सोच रहा है। क्योंकि पाकिस्तान पहले से भी चीन के करीब है। साथ ही साथ नवाज शरीफ कई दिनों से रूस में है। अगर रूस चीन और पाकिस्तान की तिकड़ी बन जाती है तो भारत के लिए मुश्किल स्थिति बन जाएगा।

अमेरिका ने सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया जिसमें भारत ने वोटिंग में भाग ही नहीं लिया। मतलब साफ है भारत रूस-यूक्रेन विवाद में किसी भी देश के न तो साथ है न ही विपक्ष।

1971 के युद्ध में रूस ने भारत का साथ दिया था। रूस हमेशा भारत को सैन्य उपकरण देते रहा है। आधुनिक फाइटर प्लेन, आधुनिक हथियारों और उपकरण की आपूर्ति हमेशा रूस की ओर से हुआ है। रूस ने हमेशा भारत की आगे आकर मदद की है।

भारत की दुविधा यह है कि इसे रूस और अमेरिका दोनों से दोस्ताना संबंध की जरूरत है। पाकिस्तान ने भी दोनों देशों के साथ अपना सम्बंध रखा है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों को जानने वाले यह कहते है कि दिल्ली को जितनी जरूरत मॉस्को की है उससे तनिक भी कम नहीं है वॉशिंगटन डीसी की जरूरत। मतलब साफ है अपने दोस्ताना सम्बंध को कायम रखने के लिए भारत ने रूस का विरोध नहीं किया।

UNSC में भारत के निर्णय से अमेरिका नाखुश

UNSC में भारत के निर्णय से अमेरिका खुश नहीं है। अमेरिका चाहता है कि सभी सदस्य देश रूस के खिलाफ वोट करें। लेकिन इसने तटस्थ रहने का फैसला किया है। भारत के तटस्थ रहने के निर्णय से परोक्ष रूप से रूस का साथ होना ही प्रतीत होता है।

दरअसल अमेरिका द्वारा UNSC में रूस के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव में रूस को यूक्रेन की सीमाओं से बिना किसी शर्त लौट जाने की बात कही गयी है। इस प्रस्ताव में रूस द्वारा डोनेस्क और लोहान्स्क को अलग स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के निर्णय को स्थगित करने की भी बात कही गयी है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के इस प्रस्ताव से केवल भारत ने ही नहीं बल्कि चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने दूरी बना ली है।

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Cartoonist Irfan

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