गौ-हत्या पर प्रतिबंध की राजनीति करने वाली BJP गोवा में गौ मांस पर बैन क्यों नहीं लगाती है ? क्या है इसका असली कारण ?

भाजपा(BJP) के हिंदुत्ववादी राजनीति में जितना महत्व रामजन्म भूमि का है उतना ही महत्व गाय की भी है। भाजपा गौ-हत्या तथा गौ-मांस की ब्रिकी पर बैन लगाने के लिए आंदोलन की है और कानून भी बनाई है।

देश में तो गाय की तस्करी, गौ मांस की बिक्री के नाम पर मॉब लॉन्चिंग तक हो जाती है। अल्पसंख्यक समुदाय हमेशा निशाने पर रहता है।

लेकिन गोवा में भाजपा के हिंदुत्व में गाय का उतना महत्व क्यों नहीं है जितना उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात आदि राज्यों की राजनीति में है?

इसका कारण है गोवा की ईसाई आबादी। यहां की जनसंख्या का 28 प्रतिशत आबादी ईसाई है। ईसाई आबादी भाजपा को भी वोट देती है। गोवा में देश विदेश के पर्यटक घूमने आते हैं। उनके खाने में गौ मांस परोसा जाता है।

प्रतिबंध लगाने से यहां के  हिन्दू औऱ ईसाई दोनों प्रभावित होंगे।भाजपा  यहां गाय को मुद्दा नहीं बनाती है। हालांकि पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक में गौ-मांस पर पूर्ण प्रतिबंध है।

गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध देश के मात्र 11 राज्यों में है। गौ-हत्या कानून के उल्लंघन पर कड़ी सजा भी इन्हीं राज्यों में है। छत्तीसगढ़ के अलावा सभी राज्यों में भैंस के काटे जाने पर रोक नहीं है

देश मे 8 राज्यों में गौ हत्या पर आंशिक प्रतिबंध लगा हुआ है। इनमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा शामिल है।

इसी तरह चार केंद्र शासित राज्यों – दमन और दीव, दादर और नागर हवेली, पांडिचेरी, अंडमान ओर निकोबार द्वीप समूह में भी आंशिक प्रतिबंध लागू है।

वही देश के 10 राज्यों  केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और एक केंद्र शासित राज्य लक्षद्वीप में गौ-हत्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

असम और पश्चिम बंगाल में ‘फिट फॉर स्लॉटर सर्टिफिकेट’ प्राप्त पशुओं को काटा जा सकता है। 14 साल से अधिक उम्र वाले या जिस में प्रजनन की शक्ति न बचे वैसे पशुओं को फिट फॉर स्लॉटर सर्टिफिकेट’ दिया जाता है।