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वसीम रिज़वी इस्लाम छोड़ बने हिन्दू, क्यों और कैसे ?

वसीम रिज़वी/waseem rizvi

वसीम रिज़वी को विवादित धर्मगुरु नरसिंहानंद ने कराया धर्मपरिवर्तन

उत्तर प्रदेश शिया वक्‍फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एवं विवादित इस्लाम स्कॉलर वसीम रिजवी ने सोमवार को अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है। विवादित धर्मगुरु एवं गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर के महन्थ यति नरसिंहानंद ने सानिध्य में वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म त्याग कर हिन्दू धर्म को स्वीकार कर लिया है। इस तरह वसीम रिजवी अब जितेंद्र नारायण त्यागी बन गए है। धर्म परिवर्तन के बाद  उन्होंने कहा कि मुझे इस्लाम से निकाल दिया गया है। इसलिए मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया हूँ।  सनातन धर्म दुनिया का सबसे पहला धर्म है। इस धर्म में बहुत अधिक अच्छाइयां है। उन्होंने कहा कि हर जुमे की नमाज के बाद हमारे सिर को काटने का फतवा जारी होता है तो ऐसी हालात में खुद को मुस्लिम कहने में शर्मिंदगी महसूस होती है।

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने वसीम रिजवी के  माथे पर त्रिपुंड लगाकर, गले में भगवा बाना पहनाकर विधिवत मंत्रोच्चार पूर्वक इस्लाम से हिन्दू  बनाया। नरसिंहानंद ने बताया कि धर्म परिवर्तन करने के बाद वसीम रिजवी अपना मुस्लिम नाम छोड़ अब जितेंद्र नारायण सिंह बन गए और ये त्यागी बिरादरी से जुड़ेंगे।

विवादित स्कॉलर है वसीम रिज़वी

 वसीम रिजवी हमेशा अपने विवादित बयानों के कारण चर्चित रहे हैं। खासकर 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद इन्होंने एक के बाद एक इस्लाम विरोधी बयान देकर राजनीतिक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है । जब सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि मामले की सुनवाई ने गति पकड़ी तो वसीम रिजवी ने देश की 9 मस्जिदों को हिंदुओं को सौंप दिए जाने की बात उठाई थी। साथ ही उन्होंने कुतुब मीनार परिसर में स्थित मस्जिद को हिंदुस्तान की धरती का कलंक बताकर ढेरों सुर्खियां बटोरी।

वसीम रिजवी ने कुरान की 26 आयतों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की थी तथा मदरसों में बच्चों को मिल रही तलीम पर फौरन रोक लगाने की मांग भी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मदरसों की तालीम में  आतंकवाद की शिक्षा मिलती है । उनके इस बयान के  बाद शिया और सुन्नी दोनों के उलेमाओं ने इनके खिलाफ फतवा  जारी की और इन्हें  इस्लाम से बेदखल कर दिया था।

वसीम रिजवी की पारिवारिक जन्म कुंडली

 शिया मुस्लिम परिवार में जन्मे वसीम रिज़वी के  पिता रेलवे के कर्मचारी थे।  रिजवी जब छोटे थे तभी इनके पिता का निधन हो गया था।  अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़े रिजवी 12वीं की पढ़ाई के बाद सऊदी अरब चले गए जहाँ इनको एक होटल में नौकरी मिली। बाद में इन्होंने लखनऊ में ही अपने बिजनेस की शुरुआत की। फिर उन्होंने नगर निगम का चुनाव लड़ने का फैसला किया। इन्होंने दो शादियां की हैं और इन पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगा है।

शिया मौलाना कल्बे जव्वाद से है सियासी टकराव

कभी शिया मौलाना कल्बे जव्वाद माने जाने वाले वसीम रिजवी का वर्तमान में इनके साथ सियासी टकराव की स्थिति बन गयी है। मुलायम सिंह यादव ने  मौलाना कल्बे जव्वाद की सिफारिश पर ही  वसीम रिजवी को शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बनाया था। बाद में, वक्फ बोर्ड के जमीन की कथित हेरा फेरी के मामले में वसीम रिजवी की इनसे अनबन हो गई जो आज टकराव की स्थिति में बदल चुकी है।

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