विकास के लिए मुफ्तखोरी बंद करनी होगी

विकास के लिए मुफ्तखोरी बंद करनी होगी

By मों अलताफ अली

अगले साल पांच राज्यों में इलेक्शन होने वाले हैं, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गयी है। मैं इलेक्शन कम्पैन की बात नहीं कर रहा हूँ, वो तो हर समय और हर रोज़ होती ही रहती है। मैं उस तैयारी की बात कर रहा हूँ जिसमें वोटर्स को रिझाने के लिए मुफ्त चीज़ें बाँटी जाती है।  चुनाव में जब राजनीतिक दलों के नेता वोट मांगने जाते हैं तब उनके सर पर ‘वादों’ की गठरी होती है और हाथ में मुफ्त में बाँटने वाला सामान! कोई कपडा,सॉल आदि तो कोई मिक्सर ग्राइंडर तक लेकर जाता है। यह तरीका असल में ग़रीब और मासूम जनता के आँख में धूल झोखने वाला ही है। राजनीतिक दलों के नेता वादा करते हैं कि अगर मेरी सरकार बनती है तो मैं सभी बच्चों को फ्री लैपटॉप दूंगा तो कोई मुफ्त साइकिल की बात करता है। बजट ज्यादा हुआ तो मुफ्त बिजली और पानी तक देने की बात करता है।

मछली बाँटने के स्थान पर यदि उसे मछली पकड़ना सिखाये

कहावत है कि किसी को मछली बाँटने के स्थान पर यदि उसे मछली पकड़ना सिखाये तो वो अधिक लाभप्रद होता है, लेकिन ये राजनीतिक दल सोचती हैं कि अगर इन जनता को मछली पकड़ने सीखा दिया गया तो अगली बार कोई मछली मांगने नहीं आएगा इसलिए इन थोड़ा थोड़ा मछली बांटते रहो और अपना कुर्सी चमकते रहो। पुरे भारत की आधे से ज्यादा लोग BPL कार्ड धारक हैं इसलिए नहीं की वो ग़रीब है जो लोग अमीर भी है वो भी किसी तरह अपना कार्ड बना लिए है ताकि हर महीने फ्री आनाज मिल जाये और हमें कोई काम नहीं करना पड़े और टैक्स से भी बचे रहे।

हम सरकारों और उनके कामों की बुराई करते है

हम सरकारों और उनके कामों की इतनी बुराई करते है, लेकिन देश के नागरिक भी कुछ कम नहीं है उन्हें मुफ्त की खाने की आदत हो गयी है। वो इस इंतज़ार में रहते है कि कौन सी सरकार उन्हें ज्यादा मुफ्त में चीज़ें दे रही है और किस योजना के तहत उन्हें पैसा मिल रहा है। वो लोग जो कल तक बेटियों के पैदा होने पर रोते थे और अपनी बीबियों को गली देते और मारते थे  वही लोग 2000 रुपया मिलने से खुश हो गये और नौबत ये है की अब बेटों को कम उम्र में ही काम पर भेज देते है और बेटियों को स्कूल-कॉलेज भेजा जा रहा है।  ताकि उन्हें स्कॉलरशिप/पोशाक के पैसे मिल सके। बेटियोँ को ज्यादा से ज्यादा पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए सरकार ने ये स्कीम लायी थी,लेकिन  कुछ लोग इसे पैसे कमाने का जरिया बना लिए है। ऐसी शिक्षा की बेटियों को जरूरत नहीं है जिसमें सिर्फ डिग्री मिल जाये और दुनिया समाज की कोई ज्ञान ही न हो।

अगर यही हाल रहा देश का तो भारत भी वेनेजुएला की तरह हो जायेगा जहाँ सब कुछ मुफ्त प्रदान करने से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। समय आ गया है कि भारत में राजनितिक दलों को चुनाव जीतने के लिए मुफ्तखोरी पर विराम लगाना चाहिए,और इसके बजाय नयी तकनीकों में निवेश किया जाये और नागरिको को आत्मनिर्भर और कुशल बनाने पर काम किया जाये।

thinkerbabu

Pawan Toon Cartoon

Leave a Comment

Your email address will not be published.