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तूफ़ान पर शायरी

तूफ़ान पर शायरी
तूफ़ान पर शायरी

ख़ुद पर कोई तूफ़ान गुज़र जाने के डर से
मैं बंद हूँ कमरे में बिखर जाने के डर से
हुस्न अज़ीज़

साहिल के सिक्कों से किसे इनकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
आल-ए-अहमद सरवर

जिसको तूफ़ाँ से उलझने की हो आदत मुहसिन
ऐसी कश्ती को समुंद्र भी दुआ देता है

सब एहतिमाम जानिए अगले बहार का
तूफ़ान आएं ,फूल झड़ें,आशयां गिरें

तहज़ीब ही इस शहर को मिस्मार करेगी
तूफ़ान के पहरे पे तायिनात समुंद्र
ज़ीशान साजिद

बढ़के तूफ़ान को आग़ोश में ले-ले अपनी
डूबने वाले तेरे हाथ से साहिल तो गया
अबद अलहमेद अदम

तूफ़ान की ज़द में थे ख़यालों के सफ़ीने
मैं उल्टा समुंद्र की तरफ़ भाग रहा था
आफ़ताब शमसी

मैं ग़र्क़ हो रहा था कि तूफ़ान-ए- इशक़ ने
इक मौजे बेक़रार को साहिल बना दिया
दिल शाहजहाँ पूरी

तूफ़ान पर शायरी

दिल में तूफ़ान हो गया बरपा
तुमने जब मुस्कुरा के देख लिया
नामालूम

उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा
देखो मुझे गर तुमने समुंद्र नहीं देखा
आलम-ए-ताब तिश्ना

ये तूफ़ान-ए-हवादिस और तलातुम बाद-ओ-बाराँ के
मुहब्बत के सहारे कश्ती-ए-दिल है रवां अब तक
वासिफ़ देहलवी

तूफ़ान समुंद्र के ना दरिया के भंवर देख
साहिल की तमन्ना है तो मौजों का सफ़र देख
गुहर ख़ैराबादी

आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुम्किन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाये
बह्ज़ाद लखनवी

सरक ए मौज सलामत तो रहे साहिल ले
तुझको क्या काम जो कश्ती मेरी तूफ़ान में है
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

हर-सम्त ग़म-ए-हिज्र के तूफ़ान है मुहसिन
मत पूछ के कितने परेशान है मुहसिन
मुहसिन नक़वी

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1 Comment
  1. nice poem collection

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