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एक ऐसा देश भी है जहां सोना(Gold)को खाने और शराब में मिला कर खाया जाता है।

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क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां सोना(Gold)को चावल, सब्जी और शराब में मिला कर उसका सेवन किया जाता है। आप हैरत में पड़ जाएंगे जब यह पता चले कि यह देश आपका पड़ोसी ही है। पड़ोसी देश बर्मा के जनजीवन में सोना का बहुत महत्व है। यहां सोना केवल आभूषण के रूप में ही नहीं बल्कि भोजन की थाली का भी हिस्सा बन चुका है।

शराब में मिलाया जाता है “सोने का पत्तर”

बर्मा में शराब में सोना मिलाकर पीने का बहुत ही महत्व है। लेकिन यह किसी ब्रांडेड शराब में नहीं मिलाया जाता है बल्कि स्थानीय लोगों के द्वारा बनाए जा रहे शराब में सोना मिलाया जाता है।
बर्मा में जब लोकल शराब बनाया जाता है तो उसी क्रम में उसमें सोने का पत्तर डाला जाता है। इस तरह सोना मिले हुए शराब को पीया जाता है। बर्मा के लोग इस लोकल शराब को शौक से “व्हाइट व्हिस्की” कहते हैं। शराब पीना बर्मा की संस्कृति का हिस्सा है। सोना “शुद्धता” का प्रतीक है। इस लिए इसे शराब में मिलाया जाता है ताकि पीने वाले को शुद्धता का एहसास हो सके।

चावल और सब्जी में भी “सोना” का होता है उपयोग

बर्मा में लोगों के भोजन की थाली में भी सोना की मौजूदगी होती है। चावल,सब्जी जैसे रोजमर्रा वाली भोजन में भी सोना मिलाया जाता है। खाना पकाने के क्रम में ही “सोने” की महीन पत्तर को डाल दिया जाता है। अगर किसी समारोह में विशेष व्यंजन बनना हो तो उसमें भी डाला जाता है।

बर्मा में सोना “पवित्रता” का प्रतीक माना जाता है

बर्मा में सोना( Gold ) को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। दरअसल, यहां की कुल आबादी का 90 प्रतिशत हिस्सा बौद्ध है। लाजमी है, यहाँ की संस्कृति में बौद्ध धर्म का बहुत प्रभाव है। बौद्ध धर्म में “सोने” को महत्वपूर्ण माना जाता है। बौद्ध धर्म के अनुसार सोना “उगते सूर्य” का प्रतीक है जो सफलता की नई सुबह लाने वाली मानी जाती है। बौद्ध मठों में, यहाँ की मूर्तियों में सोना का आवरण होता है। बौद्ध धर्म के धार्मिक कर्मकांड में सोना का बहुत महत्व है। इस लिए इसका उपयोग खाने पीने की चीजों में होता है।

आयुर्वेद में है स्वर्ण भस्म के प्रयोग की चर्चा

हमारे आयुर्वेद में भी कई धातुओं के भस्म के उपयोग की चर्चा है जिससे हमारे शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। जैसे रजत भस्म, लौह भस्म, स्वर्ण भस्म।

सोना का होता है अवैध खनन

अब यह सवाल पैदा होता है कि बर्मा के लोगों को इतना सोना( Gold ) कैसे उपलब्ध हो पाता है। यह सब यहां होने वाले अवैध खनन के कारण सम्भव हो पाता है। यहां सोने की कई खदानें हैं। बर्मा का एक शहर है “मांडले”। यहां सोने की कई खदाने हैं। यहां बालू का खनन होता है। बालू से सोने को अलग किया जाता है जिसमें पारा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि पारे के उपयोग से नदियों की मछलियां मर जाती है लेकिन फिर भी यहां बालू से सोना निकालने के लिए पारे का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है। अवैध निकासी के क्रम में किसी भी मापदंडों का पालन नहीं किया जाता है। जिसके कारण यहां नदियों का जल प्रदूषित भी हो रहा है।

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