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General Motors के संस्थापक David Dunbar Buick की दुःखद कहानी

General Motors
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जब भी महान आविष्कारकों का जिक्र होगा डेविड डनबर ब्यूक (David Dunbar Buick) का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर होगा।
अपने जीवनकाल के दौरान उन्होंने बागवानी प्रणाली, शौचालय फ्लशिंग उपकरणों और जंग लगे सिंक और बाथटब को पेंट करने के तरीकों का आविष्कार किया, जिनमें से कुछ आज भी उपयोग में हैं। लेकिन जिस दावे ने उन्हें प्रसिद्धि की ऊंचाइयों पर पहुंचाया, वह उस कार का निर्माण था जिसने दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता, जनरल मोटर्स (General Motors)की स्थापना की।

पिछली शताब्दी में बेचे गए 50 मिलियन से अधिक वाहनों पर ब्यूक का नाम पर “खोदा” हुआ था। लेकिन इन सभी आविष्कारों और भाग्य के बावजूद, डेविड ब्यूक का जीवन अत्यधिक गरीबी में समाप्त हुआ । उनके जीवन की असाधारण कहानी ने उनके समकालीन अमेरिकी व्यवसायियों में से एक को यह कहने के लिए मजबूर किया, “उन्होंने (डेविड ब्यूक) महानता के प्याले से एक घूंट लिया, और फिर जो उनके पास था उसे फेंक दिया।”


लेकिन यह सब कैसे हुआ?

हम जानते हैं कि David Dunbar Buick एक बहुत ही बुद्धिमान और प्रतिभाशाली आविष्कारक था, लेकिन उसे व्यवसाय करने की बहुत कम समझ थी। वह बचपन में ही 1856 में स्कॉटलैंड के अर्ब्रोथ क्षेत्र से संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर बस गए। वहां पले-बढ़े, उन्होंने एक प्लंबिंग के संयुक्त व्यवसाय की स्थापना की।

यह उनकी एकमात्र महान उपलब्धियों में से एक थी लेकिन ब्यूक इससे खुश नहीं थे उन्हें खुद को साबित करना था। उन्नीसवीं सदी के अंत तक, उन्हें एक और शौक था। उन्हें मोटर इंजन बनाने में दिलचस्पी थी। उन्होंने प्लंबिंग व्यवसाय में अपनी सारी हिस्सेदारी बेच दी और उस दौरान 100,000 जुटाए और अपनी कार कंपनी की स्थापना की।


ब्यूक ऑटोमोबाइल के लिए ओवरहेड वाल्व इंजन बनाते थे, जो आज भी उपयोग में हैं, लेकिन 1902 में उन्होंने इस इंजन के साथ केवल एक कार बनाई, और उनका सारा पैसा इसी कार पर खर्च हो गया। उन्हें विलियम क्रैपो ड्यूरेंट द्वारा वित्तीय मदद मिली जिन्होंने David Dunbar Buick की डेट्रायट-आधारित कंपनी को खरीदा और बाद में इसका नाम बदलकर “जनरल मोटर्स”कर दिया। जो आज दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमेकर कंपनी है।

जनरल मोटर्स ने अपने ओवरहेड वाल्व इंजन का आविष्कार करने के लिए ब्यूक को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि “ब्यूक ब्रांड और जनरल मोटर्स के लिए उनके महत्व को वर्तमान युग में कम करके नहीं आंका जा सकता है।” एक प्रवक्ता ने कहा: “हालांकि डेविड ब्यूक की अपनी कहानी बहुत जटिल है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर यह कहानी नहीं होती तो ब्यूक कभी ऑटोमोबाइल नहीं बनता।”

ब्यूक को कुछ साल बाद एक और 100,000 डॉलर देकर कंपनी से अलग कर दिया गया । अगर उन्होंने उस समय कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखी होती, तो कंपनी के साथ रहकर भविष्य में वह जो कुछ भी कर सकते थे, उसकी तुलना में यह बहुत कम राशि थी ।
लेकिन उन्होंने अपनी दूसरी ख़ुशक़िस्मती को बदनसीबी में बदल दिया।उनहोंने बिना सोचे समझे कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में एक तेल व्यवसाय पर एक मिलियन डॉलर लगाकर अपनी सारी संपत्ति को बर्बाद कर दिया। वह 1934 में 69 वर्ष की आयु में डेट्रॉइट लौट आए और इतने गरीब थे कि उनके पास घर पर फोन करने के लिए भी पैसे नहीं थे। अंततः उन्हें डेट्रॉइट स्किल्स स्कूल में एक प्रशिक्षक के रूप में नौकरी मिल गई, लेकिन उनका स्वास्थ्य ख़राब रहने लगा।

छोटे कद का बूढ़ा आदमी

स्कॉटलैंड के एब्रोथ में स्थित एक सेवानिवृत्त पत्रकार जिनका नाम ऐन लैम्ब था उन्होंने शहर में ब्यूक की मूर्ति लगाने के अभियान में भाग लिया, वह ब्यूक के जीवन का वर्णन करते हुए कहते हैं “जब वह और कमज़ोर और बूढ़े हो गए तो उन्हें स्कूल में कौशल सिखाने वाले डेस्क पर मामूली काम करते हुए देखा जा सकता था। जहाँ उन्हें एक कमज़ोर छोटे कद के बूढ़े के तौर पर जाना जाता था जो हर आने वाले व्यक्ति को अपने मोटे मोटे चश्मे के पीछे से घूरते थे ” मार्च 1929 में डेट्रॉइट के हार्पर अस्पताल में निमोनिया से उनकी मृत्यु हो गई, जहां उन्हें एक ट्यूमर के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उस समय वे 74 वर्ष के थे।

अस्पताल में भर्ती होने से कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में David Dunbar Buick ने कहा: “मैं चिंतित नहीं हूं। असफलता उस व्यक्ति के लिए है जो गिरने के बाद बैठा रह जाता है और फिर से उठने के बजाय कल क्या हुआ उसके बारे में चिंता करता है। खड़े हो जाओ और देखो आज और आने वाले कल में क्या करना है । आने वाले कल को देखना ही सबसे बड़ी सफलता है,” उन्होंने कहा। मैं किसी पर भी धोखा करने का आरोप नहीं लगाता, यह तो किस्मत का खेल था कि मैंने अपनी बनाई कंपनी खो दी।”

जून 1994 में अर्ब्रोथ में पूर्व मेसोनिक हॉल की दीवारों पर एक यादगारी पट्टिका लगाई गई थी, उस सड़क पर एकमात्र बच जाने वाली इमारत वही थी जहां उनका जन्म हुआ था। इस यादगारी पट्टिका के अनावरण पर, जनरल मोटर्स के वरिष्ठ कार्यकारी रॉबर्ट कोलेटा ने कहा, “ब्यूक लगभग पूरी 20 वीं शताब्दी के लिए अमेरिकी मोटर वाहन उद्योग में सबसे बड़े नामों में से एक रहा है।”

उन्होंने कहा, “इस व्यक्ति का सम्मान करना हमारे लिए निश्चित रूप से उचित है, न केवल इसलिए कि उसका नाम हमारे वाहनों की पहचान से जुड़ा है, बल्कि इसलिए भी कि उसकी बुद्धिमत्ता और कड़ी मेहनत ने ऑटोमोबाइल को एक अद्वितीय सफलता की कहानी बना दिया है सफलता की ये कहानी अभी भी लिखी जा रही है। दो साल पहले, न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी थी कि ब्यूक का नाम अब General Motors के उत्तरी अमेरिकी मॉडल के पीछे नहीं लगाया जा रहा है । यहां तक ​​कि चीन में, जहां अधिकांश ब्यूक मॉडल बेचे जाते हैं, इन वाहनों से नेमप्लेट पहले ही हटा दी गई है।

और ऐन लैम्ब और अन्य लोगों के प्रयासों के बावजूद, स्कॉटलैंड का इतिहास की किताबों में ब्यूक का नाम शामिल करने और अपने गृहनगर में उनकी एक मूर्ति लगाने का कोई इरादा नहीं है। उनकी याद में अब्रोथ में इमारत की दीवार पर लगी पट्टिका ही है, जो ज्यादातर स्थानीय लोगों की नजरों से छिपी हुई है। ऐन लैम्ब का कहना है कि उनकी प्रतिमा स्थापित करना कार के आविष्कारक के लिए एक बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

“डेविड ब्यूक की शक्ल में हमारे पास एक ऐसा व्यक्ति था जो मोटर कारों के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति करने के लिए जिम्मेदार था, वह विकास आज पूरी दुनिया में उपयोग किया जाता है, कितने लोग जानते हैं कि यह शानदार आविष्कारक यहाँ अब्रोथ में पैदा हुआ था?” हां, इस गली में आखिरी इमारत की दीवार पर एक पट्टिका है जहां उनका जन्म हुआ था, लेकिन इस शहर के अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता नहीं है।”
“ब्यूक को याद किए जाने का अधिकार है।”

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