बेबी रानी मौर्य के कंधे पर बीजेपी के दलित वोटों का भार

बेबी रानी मौर्य के कंधे पर बीजेपी के दलित वोटों का भार!

उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल और बीजेपी की राष्ट्रीय‌ उपाध्यक्ष बेबी रानी मौर्य (Baby Rani Maurya) की तुलना इन दिनों उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से की जा रही है। भाजपा बेबी मौर्य के चेहरे को राज्य में बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि क्या भाजपा बेबी रानी मौर्य के कंधे पर ही दलित वोटों के ध्रुवीकरण का सारा भार सौंप चुकी है।

बेबी मौर्य की तुलना मायावती से की जा रही है

इन दिनों राज्य में भाजपा बेबी मौर्य (Baby Rani Maurya) के चेहरे को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही है। न सिर्फ भाजपा बल्कि राजनीति के गलियारों में भी मायावती से इनकी तुलना की जा रही है। भाजपा के पास प्रदेश में इन से बढ़ा कोई दलित चेहरा नहीं है। लेकिन खुद बेबी रानी मौर्य अपने आप की मायावती से तुलना को नकारती हैं। बेबी बताती है कि वो भाजपा की सिपाही हैं और उनकी पहचान भी भाजपा से ही जुडी रहनी चाहिए न कि मायावती के कम्पटीटर के रूप में।

जीतने पर मिल सकती है मौर्य को अहम जिम्मेदारी

राज्य के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बेबी रानी मौर्य (Baby Rani Maurya) अगर चुनाव जीत जाती हैं तो उन्हें सरकार में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। सरकार में कोई महत्वपूर्ण पद से नवाजा जायेगा। इसी से बेबी मौर्य की अहमियत का पता चलता है। वास्तव में, बेबी मौर्य के जरिए ही भाजपा राज्य के दलित वोटों को साधना चाहती है।

कौन हैं बेबी रानी मौर्य (Baby Rani Maurya) ?

बेबी रानी मौर्य (Baby Rani Maurya) इन दिनों उत्तरप्रदेश भाजपा के सबसे बड़े दलित चेहरा हैं। बेबी लम्बे समय से भाजपा में सक्रिय रही हैं। वो उत्तराखंड की राज्यपाल रह चुकी है। वो राज्यपाल के पद से त्यागपत्र दे कर भाजपा की राष्ट्रीय‌ उपाध्यक्ष बनी है। भाजपा ने इन्हें इस बार आगरा ज़िले की ग्रामीण (सुरक्षित) सीट से विधानसभा उम्मीदवार बनाया।

किस विधासभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं बेबी मौर्य ?

बेबी रानी मौर्य (Baby Rani Maurya) आगरा ज़िले की ग्रामीण (सुरक्षित) सीट से विधानसभा से चुनाव लड़ रही है। यह सीट दलित बहुसंख्यक सीट है। इस क्षेत्र को उत्तरप्रदेश में “दलितों की राजधानी” भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में मायावती का अधिक प्रभाव माना जाता है। मायावती के दलित वोट में सेंध लगाने के लिए ही बेबी मौर्य को आगे किया जा रहा है।

मायावती कितनी बार मुख्यमंत्री बनी हैं ?

उत्तरप्रदेश में सबसे लोकप्रिय दलित नेता मायावती राज्य की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। हालंकि अब दलितों पर मायावती की पकड़ कम होती चली जा रही है। साल 2014 के आम चुनाव में मायावती का प्रदर्शन बिलकुल खराब रहा है। सीट पर जीत दर्ज करने के मामले में वो पिछड़ चुकी थी। लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में पार्टी का वोट प्रतिशत बीस फ़ीसदी के क़रीब रहा था।

मायावती के प्रदर्शन में आई है गिरावट

मायावती राज्य के सबसे लोकप्रिय दलित चेहरा हैं। लेकिन साल 2014 के आम चुनाव से ही इनकी पार्टी बीएसपी के प्रदर्शन में काफ़ी गिरावट आई रही है। इस बार भीम सेना के बढ़ते प्रभाव के कारण मायावती के झोली से दलित वोट बिखरने की बात कही जा रही है। भाजपा बेबी मौर्य (Baby Rani Maurya) के जरिए मायावती के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। बेबी मौर्य राज्य के “जाटव” समाज से आती है। मायावती भी जाटव समाज की ही हैं। राज्यपाल के पद को छोड़ चुनाव लड़ रही बेबी मौर्य दलित है। हालाँकि कई जगहों पर ख़ास कर पूर्वांचल में मौर्य को पिछड़ा वर्ग में माना जाता है लेकिन ब्रज के इलाके जाटव जो कि दलितों की जाति है, मौर्य सरनेम लगाती है।

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