तेजस्वी की शादी के राजनीतिक मायने

तेजस्वी की शादी के राजनीतिक मायने

देश की मीडिया जगत में एक-दो दिनों से बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की शादी की खबरें अचानक से छा चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजस्वी यादव की शादी उनके बचपन के दोस्त और ईसाई परिवार की बेटी एलेक्सिस रसेल से हुई है। इनका परिवार  हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रहने वाले हैं।

हालांकि तेजस्वी यादव  के परिवार में लड़की के धर्म को लेकर अजीब सी चुपी छाई है। सीमित नजदीकी रिश्तेदारों के बीच हिन्दू रीति रिवाजों से इनकी शादी संपन्न हुई। कई रिपोर्टों में एलेक्सिस रसेल का नाम राजश्री बताया जा रहा है। यानि दुल्हन के ईसाई होने की खबर को चुपचाप गुमनाम किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

दोनों दिल्ली स्थित आरकेपुरम दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में एक साथ पढ़ते थे। दोनों पहले से ही एक दूसरे के अच्छे दोस्त बताए जा रहे हैं। तेजस्वी कक्षा 9 पास हैं, जबकि राजश्री उच्च शिक्षित बताई जा रही हैं। खबर ये भी आ रही है के एलेक्सिस रसेल एक एयर होस्टेस हैं।

लड़की के धर्म को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है

मीसा भारती Twitter पर दुल्हन का नाम राजश्री बता रही है। यानि इन्हें हिन्दू बताने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन वही  लालू यादव के छोटे भाई सूर्यदेव यादव ने एबीपी के साथ बातचीत में कहा कि तेजस्वी यादव की शादी एक ईसाई लड़की से हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि लालू यादव ने फोन पर शादी की जानकारी दी है। साथ ही इस मसले पर परिवार के अन्य लोगों की चुपी भी कई सवाल पैदा कर रही है। तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेजप्रताप तथा बहन रोहणी आचार्य ने भी शादी को लेकर ट्वीट किया है लेकिन इन दोनों ने दुल्हन या दूल्हे का नाम नहीं लिखा है। यानि दुल्हन की धर्मिक पहचान को लेकर खामोश दिखे।

आखिर दुल्हन के धर्म को लेकर लालू परिवार में क्यों कायम है खामोशी

लालू परिवार में दुल्हन की धार्मिक पहचान को लेकर खामोश है। इसका सीधा सम्बंध राजनीति से है। बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव एक कद्दावर नेता है तथा बिहार में पूरे लालू परिवार की पहचान यादव जाति से लिपटी है। लालू परिवार मुस्लिम-यादव समीकरण के बल पर बिहार की राजनीति में दशकों तक राज किया है। यादव वोटों के ध्रुवीकरण के लिए खुद कभी लालू यादव कहा करते थे कि “वोट और बेटी” जाति देख कर ही देना चाहिए।  यानि वोट भी अपनी ही जाति के उम्मीदवार को देना चाहिए और शादी भी अपनी ही जाति में करना चाहिए। आज तेजस्वी की शादी से उस समीकरण के खिलाफ विपक्ष को बोलने का अवसर मिल सकता है। बिहार की राजनीति में ईसाई वोट की कोई भूमिका नहीं है। ऐसे में विपक्ष इनकी जातिगत पहचान को तोड़ने के लिए इस शादी का हवाला दे सकती है।

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