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बिहार में वित्तरहित शिक्षक आंदोलन की कर रह हैं तैयारी

वित्तरहित शिक्षक
वित्तरहित शिक्षक

वित्तरहित शिक्षक : न घर के न घाट के

बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने अपने दो दिवसीय बैठक में सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला किया है।
फैक्टनेब के प्रधान संयोजक डा. शंभूनाथ प्रसाद सिन्हा की अध्यक्षता में पटना में संपन्न हुई राज्य समिति की दो दिवसीय बैठक में यह फैसला लिया गया। फैक्टनेब के मीडिया प्रभारी प्रो अरुण गौतम ने बताया कि महासंघ अपनी मांग को लेकर व्यापक आंदोलन की तैयारी कर रही है। इसके तहत आगामी विधानसभा सत्र के दौरान बिहार विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन और धरना दिया जाएगा। सत्र शुरू होने से पहले ही 8 फरवरी 2022 बिहार से सभी विश्वविद्यालयों के मुख्यालयों का घेराव करने का निर्णय लिया गया है।

वित्तरहित शिक्षक क्यों कर रहे हैं हड़ताल की तैयारी?

वित्तरहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कई मांगे हैं जो लंबे समय से अटकी हैं। दरअसल, यह असमान वेतनमान का मसला है। इन्हें UGC द्वारा निर्धारित वेतनमान से वंचित रखा गया है। इनकी हालत अनुबंध वाले स्कूली शिक्षकों से भी बुरी है। इन्हें न तो वेतनमान मिलता न ही पेंशन, न बीमा की सुविधा न ही PF। इसके बावजूद सरकार जो राशि वेतन के रूप में निर्धारित कर चुकी है वह भी समय से नहीं देती।

इस आंदोलन के जरिए इनकी मांग है कि इन्हें बकाया अनुदान राशि (इन्टरमीडिएट सहित ) का एक मुश्त भुगतान किया जाए। संबद्ध डिग्री महाविद्यालयो में इन्टरमीडिएट की पढ़ाई हेतु अधिनियम के विरुद्ध जारी विज्ञप्ति को वापस लिया जाए। राजभवन सचिवालय द्वारा यूनिवर्सिटी और कॉलेज के लिए जारी छुट्टी की लिस्ट को संशोधित किया जाए तथा ओ. एफ.एस.एस. प्रणाली से नामांकन में लिए गए 200₹ प्रति छात्र महाविद्यालयों को भुगतान करने आदि मांगों को लेकर संबद्ध महाविद्यालय के शिक्षा कर्मी आंदोलन करेंगे। इसमें 25,000 शिक्षाकर्मियों के शामिल होने का अनुमान है। यह राज्य में विभिन्न स्तरों पर आयोजित किया जाएगा।

इन शिक्षकों का आरोप है कि राज्य सरकार संबद्ध महाविद्यालयों को बंद करना चाहती हैं। इसलिए ही उनकी मांगों को सरकार पूरा नहीं कर रही है। गौरतलब बात यह है कि बिहार में उच्च शिक्षा देने के मामले में वित्तरहित शिक्षकों की जवाबदेही 70 प्रतिशत तक मानी जाती है। फिर भी सरकार इनकी सभी मांगों को लंबे समय से अनसुनी करती आई है।

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