तकिये पर शायरी

तकिये पर शायरी

फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझको रात-भर रखा
कभी तकिया इधर रखा कभी तकिया इधर रखा
अमीर मीनाई

चलो तकिया तुम्हारे ही सिरहाने
वगरना रात-भर झगड़ा करोगी
दीपक शर्मा दीप

गर भरोसा है हमें अब तो भरोसा तेरा
और तकिया है अगर तेरे ही दर का तकिया
इंशा-अल्लाह ख़ां इंशा

है ये तकिया तरी अताओं पर
वही इसरार है ख़ताओं पर
अलताफ़ हुसैन हाली

एक ख़ुदा पर तकिया कर के बैठ गए हैं
देखो हम भी क्या -क्या कर के बैठ गए हैं
अबद अलहमेद

संग को तकिया बुना ख़ाब को चादर कर के
जिस जगह थकता हूँ पड़ रहता हूँ बिस्तर कर के
जमाल एहसानी

तकिये पर शायरी


उम्र-भर जिस पे तकिया रहा कुछ ना था दिल नहीं मानता
क्या करूँ तजज़ियों का अटल फ़ैसला दिल नहीं मानता
मुहिब आरफ़ी

तकिया उसे ना भूल के कहना कभी मियां
तकिया नहीं ये बाग़-ए-इरम है फ़क़ीर का
नज़ीर अकबराबादी

ज़ोफ़ से है ने क़नाअत से ये तर्क-ए-जुस्तुजू
हैं वबाल तकयागाह हिम्मत-ए-मर्दाना हम
मिर्ज़ा ग़ालिब

ये चादर सिलवटें तकिया
बताते हैं मैं ग़ाफ़िल हूँ
पूजा भाटिया

हमारी नींद की हसरत तो देखो
तुम्हें तकिया बनाना चाहती है
असलम राशिद

ख़ाब बुनतारहूं में बिस्तर पर
और तकिया करूँ मुक़द्दर पर
काशिफ़ हुसैन ग़ाइर

तकिये पर शायरी

सोती क़िस्मत की नींद उड़ावेगा
नरम तकिया किसी के ज़ानू का
आरज़ू लखनवी

एक बिस्तर है बीच में तकिया
कैसे सोएँगे रात-भर दोनों
दिनेश कुमार द्रोना

तकिया था ज़ाद-ए-राह पर अपना
राहज़न कितने काम आए हैं
दिल अय्यूबी

ये जिस्म का बोरिया तकिया के
इक ताक़ के ऊपर छोड़ फ़क़ीर
शफ़क़ सोपूरी

वही मस्तूल ढीला करते हैं
जिन पे तकिया बला का होता है
इबन उम्मीद

आगे तो नहीं नहीं सुनी थी
अब तकयाकलाम हो गई है
दाग़ध-ए-देहलवी

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