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swagat shayari

पेड़ पर शायरी

पेड़ पर शायरी

इन दरख़्तों से भी नाता जोड़िएजिन दरख़्तों का कोई साया नहींरौनक नईम आग भी बरसी दरख़्तों पर वहींकाल बस्ती में जहां, पानी का थासलीम शहज़ाद फलदार दरख़्तों ने रिझाया तो मुझे भीआज़ाद परिंदों के लिए शाख़-ओ-स...