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raat shayari

कारवां पर शायरी

कारवां पर शायरी

ये किस मुक़ाम पे पहुंचा है कारवान वफ़ाहै एक ज़हर सा फैला हुआ फ़िज़ाओं मेंअय्यूब साबिर चला जाता है कारवान-ए-नफ़सना बाँग-ए-दिरा है ना सौत-ए-जरसवहशतध रज़ा अली कलकत्वी अजल ने लूट लिया आके कारवान हयातसुना ...