बुढ़ापे पर शायरी

बुढ़ापे पर शायरी

बुढ़ापे पर शायरी कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लोटती नहींजा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के लाअबद अलहमेद अदम बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफ़ा करेंबूढ़ों को भी जो मौत ना आए तो क्या करेंअकबर इला आबादी सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरामैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिरज़फ़र इक़बाल …

बुढ़ापे पर शायरी Read More »