पानी पर शायरी

पानी पर शायरी

ये समुंद्र ही इजाज़त नहीं देता वर्नामैंने पानी पे तेरे नक़्श बना देने थे۔आँख में पानी रखूँ , होंटों पे चिंगारी रखूँज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखूँराहत इंदौरी۔मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते हैंहंस तालाब पे आते हैं चले जाते हैंअब्बास ताबिश۔एक निशानी ये उसके के गाँव कीहर नलके का पानी मीठा होता …

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