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mujhe maut aa jaye shayari

तूफ़ान पर शायरी

तूफ़ान पर शायरी

ख़ुद पर कोई तूफ़ान गुज़र जाने के डर सेमैं बंद हूँ कमरे में बिखर जाने के डर सेहुस्न अज़ीज़ साहिल के सिक्कों से किसे इनकार है लेकिनतूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ हैआल-ए-अहमद सरवर जिसको तूफ़ाँ से उलझ...

दफ़न पर शायरी

दफ़न पर शायरी

कई लाशें हैं मुझमें दफ़न यानीमैं क़ब्रिस्तान हूँ शुरूआत ही सेतरी पुरारी यहां तो रस्म है ज़िंदों को दफ़न करने कीकिसी भी क़ब्र से मुर्दा कहाँ निकलता हैख़ुरशीद अकबर सात संदूक़ों में भर कर दफ़न कर दो नफ़र...