मोहब्बत शायरी

मोहब्बत शायरी

मोहब्बत शायरी उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जायेबशीर बदर और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवाराहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवाफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ रंजिश ही सही दिल ही दिखाने के लिए आआ फिर से मुझे छोड़ के जाने के …

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