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एक सुन्दर कविता

प्रेमिका के लिए एक सुन्दर कविता

दुआए नीम शबी अपने पाकीज़ा जज़्बों को गवाह बना करअब की बार भी ईद का चांद देखकरमैं दुआ माँगूँ अपने और तुम्हारे साथ कीबस तुम इतना करनाकि जब मेरी आँखों का नमकीन पानीमेरी फैली हथेली पर गिरेतो मेरी दुआए नीम शबी को मुकम्मल करनामेरे मुक़द्दस लफ़्ज़ों की लाज रखनासिदक़-ए-दिल से कहना आमीन ​ ईद आने …

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झील पर शायरी

झील पर शायरी

वो लाला बदन झील में उतरा नहीं वर्नाशोले मुतवातिर इसी पानी से निकलतेमहफ़ूज़ अलरहमान आदिल सामने झील है झील में आसमाँआसमाँ में ये उड़ता हुआ कौन हैफ़ारूक़ शफ़क़ सूख गई जब आँखों में प्यार की नीली झील क़तीलतेरे दर्द का ज़र्द समुंद्र काहे शोर मचाएगाक़तील शिफ़ाई गहिरी ख़मूश झील के पानी को यूं ना छेड़छींटे …

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कागज पर शायरी

कागज पर शायरी

लिख के रख देता हूँ अलफ़ाज़ सभी काग़ज़ परलफ़्ज़ ख़ुद बोल के तासीर बना लेते हैंमुहम्मद मुस्तहसिन जामी कभी मैं ढलता हूँ काग़ज़ पे नक़्श की सूरतमैं लफ़्ज़ बन के किसी की ज़बां में तैरता हूँख़ावर नक़वी हर लफ़्ज़ को काग़ज़ पे उतारा नहीं जाता​हर नाम सर-ए-आम पुकारा नहीं जाताइनाम उल-हक़ जावेद​किताब-ए-क़िस्मत में कोरे-काग़ज़ भी …

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मुस्कुराहट पर शायरी

मुस्कुराहट पर शायरी

हमारी मुस्कुराहट पर ना जानादिया तो क़ब्र पर भी जल रहा हैआनिस ए ग़म-ए-ज़िंदगी ना हो नाराज़मुझको आदत है मुस्कुराने कीअबद अलहमेद अदम तुम हँसो तो दिन निकले चुप रहो तो रातें हैंकिस का ग़म कहाँ का ग़म सब फ़ुज़ूल बातें हैंनामालूम एक ऐसा भी वक़्त होता हैमुस्कुराहट भी आह होती हैजिगर आबाद य मुस्कुराहट …

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बदन पर शायरी

बदन पर शायरी

उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदनदेखने वाले उसे ताज-महल कहते हैंक़तील शिफ़ाई किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहींवो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहींफ़र्हत एहसास तुझ सा कोई जहान में नाज़ुक बदन कहाँये पंखुड़ी से होंट ये गुल सा बदन कहाँलाला माधव राम जोहर बदन के दोनों …

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बहार पर शायरी

बहार पर शायरी

मैंने देखा है बहारों में चमन को जलतेहै कोई ख़ाब की ताबीर बताने वालाअहमद फ़राज़ मेरी ज़िंदगी पे ना मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहींजिसे तेरे ग़म से हो वास्ता वो ख़िज़ां बहार से कम नहींशकील बद एवनी बहारआए तो मेरा सलाम कह देनामुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा नेकैफ़ी आज़मी बहारों की …

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अदब/आदाब पर शायरी

अदब / आदाब पर शायरी

मुहब्बत के आदाब सीखो ज़राउसे जान कह कर पुकारा करोविकास शर्मा राज़ बन जाऊं ना बेगाना-ए-आदाब-ए-मोहब्बतइतना ना क़रीब आओ, मुनासिब तो यही हैजिगर आबाद य इक तो हमको अदब आदाब ने प्यासा रखाउसपे महफ़िल में सुराही ने भी गर्दिश नहीं कीअहमद फ़राज़ रोने के भी आदाब हुआ करते हैं फ़ानीये उस की गली है तेरा …

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आवाज़ पर शायरी

आवाज़ पर शायरी

आवाज़ दे के देख लो, शायद वो मिल ही जायेवर्ना ये उम्र-भर का सफ़र-ए-राएगाँ तो हैमुनीर नियाज़ी लहजा कि जैसे सुबह की ख़ुशबू अज़ान देजी चाहता है मैं तेरीआवाज़ चूम लूंबशीर बदर बोलते रहना क्योंकि तुम्हारी बातों सेलफ़्ज़ों का ये बहता दरिया अच्छा लगता हैनामालूम ख़ुदा की उसके गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है …

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