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देशभक्ति शायरी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में हैबिस्मिल अज़ीमाबादी हम अमन चाहते हैं मगर ज़ुलम के ख़िलाफ़गर जंग लाज़िमी है तो फिर जंग ही सहीसाहिर लुधियानवी नक़्शा लेकर हाथ में बच्चा है हैरानकैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्ताननिदा फ़ाज़ली दिल से निकलेगी ना मर कर भी वतन की …

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