Home » insaniyat shayari

insaniyat shayari

ख़ुद्दारी पर शायरी

आत्ममुग्धता / ख़ुद्दारी पर शायरी

किसी को कैसे बताएं ज़रूरतें अपनीमदद मिले ना मिले आबरू तो जाती हैनामालूम मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती हैकिसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगताजावेद अख़तर किसी रईस की महफ़िल का ज़ि...

सूरज पर शायरी

कॅरोना वायरस पर शायरी

कॅरोना वायरस पर शायरी तलाश-ए-मुहब्बत में घर बैठे रोनाकॅरोना कॅरोना को बस भी करो नाअरशद सईद शहर के हालात को हल्का ना ले ।देख मेरी बात को हल्का ना ले ।۔अब मुहाफ़िज़ हैं समाजी दूरियाँफ़ासलों की घात को हल...