नसीहत पर शायरी

नसीहत / सलाह पर शायरी

हर शख़्स पर किया ना करो इतना एतिमादहर साया-दार शै को शजर मत कहा करोमुज़फ़्फ़र वारसी सुन नसीहत मेरी ए ज़ाहिद-ए-ख़ुश्कअशक के आब बिन वुज़ू मत करदाऊद औरंगाबादी किया करते हो तुम नासेह नसीहत रात-दिन मुझकोउसे भी एक दिन कुछ जा के समझाते तो क्या होतानामालूम कल थके-हारे परिंदों ने नसीहत की मुझेशाम ढल जाये …

नसीहत / सलाह पर शायरी Read More »