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कहानी सोनिया 'कृषा' की

कहानी सोनिया ‘कृषा’ की

पढ़ी-लिखी और आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर महिलाऐं सामाजिक चुनौतियों से लड़ने में सक्षम होती हैं। भले ही उनका जीवन पुरुषों की तरह सहज नहीं हो लेकिन वो कई रूढ़ियों को लांघने में सक्षम होती हैं। राजस्थान की बेट...

Meer Taqi Meer

मीर तक़ी मीर के प्रख्यात अशआर

मीर तक़ी मीर के उर्दू के प्रख्यात कवी हैं। उनकी शाइरी पूरी दुनिया मैं पढ़ी जाती है। वह उर्दू ग़ज़ल के प्रमुख कवियों में से एक थे और उन्हें अक्सर उर्दू भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवियों में सबसे बड़े कवी के रूप...

लंका क्यों नष्ट हुई

लंका क्यों नष्ट हुई?

लंका, इसलिए नष्ट हुई क्योंकि वहाँ लंकेश की आलोचना को अपराध माना गया और रामराज्य इसलिए ख्यात हुआ क्योंकि वहाँ आम धोबी को भी राजा के आचरण पर प्रश्न पूछने का अभय था।पुराण साक्षी है, कि जब भी कोई विभीषण श...

haseeb soz

हसीब सोज़ की ग़ज़लें

रोज़ कुर्ते ये कलफ़-दार कहाँ से लाऊँ_तेरे मतलब का मै किरदार कहाँ से लाऊँ_दिन निकलता है तो सौ काम निकल आते हैं,ऐ ख़ुदा इतने मददगार_ कहाँ से लाऊँ सर बुलन्दओं के लिये सर भी कटा दूं लेकिनसर फिरों के लिये दस्...

aleena itrat

अलीना इतरत की ग़ज़ल

शाम के वक़्त चिराग़ों सी जलाई हुई मैंघुप अन्धेरों की मुन्डेरों पे सजाई हुई मैं देखने वालों की नज़रों को लगूँ सादा वरक़तेरी तहरीर में हूँ ऐसे छुपाई हुई मैं ख़ाक कर के मुझे सहरा में उड़ाने वालेदेख रक़्स...

बाल कविता /Baal Kavita

बाल कविता

अब मैं भी पढूँगा कवि: डॉ अभिषेक कुमार कंसल्टेंट नेत्र विशेषज्ञ बलिया , बेगूसराय , बिहार पापा – पापा मुझको भी एक स्लेट ला दीजियेमेरा भी बहुत मन कर रहा अब मैं भी पढूँगापढ़ – लिख कर खुद एक अच्...

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

अखिलेश तिवारी की ग़ज़ल

ग़ज़ल

ग़ज़ल कवि: अखिलेश तिवारी, करके सब उसके हवाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूंकौन अक़्लो-दिल संभाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूँ वो मसाइल ज़ीस्त के हों या तसव्वुफ़ के बयानकितने ही पन्ने खंगाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूँ घर ...

Poet: Saleem Javed

सलीम जावेद की ग़ज़ल

ग़ज़ल कवि:सलीम जावेद वहशत से नारसाई से ग़म से फि़राक़ सेइन सब से वास्ता है मिरा इत्तेफा़क़ से इंसानियत के प्यार के महरो खुलूस केगा़यब हैं सब चराग़ मिरे घर के ताक़ से मैं ने विसाल लिख दिया कल आसमान परखु़...