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कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

Poet: Saleem Javed

सलीम जावेद की ग़ज़ल

ग़ज़ल कवि:सलीम जावेद वहशत से नारसाई से ग़म से फि़राक़ सेइन सब से वास्ता है मिरा इत्तेफा़क़ से इंसानियत के प्यार के महरो खुलूस केगा़यब हैं सब चराग़ मिरे घर के ताक़ से मैं ने विसाल लिख दिया कल आसमान परखु़...

पानी पर शायरी

पानी पर शायरी

ये समुंद्र ही इजाज़त नहीं देता वर्नामैंने पानी पे तेरे नक़्श बना देने थे۔आँख में पानी रखूँ , होंटों पे चिंगारी रखूँज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखूँराहत इंदौरी۔मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते ह...

चाय पर शायरी

चाय पर शायरी

हमसे नफ़रत कुछ यूं भी निभाई गईहमारे सामने चाय बना के औरों को पिलाई गईनामालूम۔चाय मेरी ज़िंदगी में लाज़िम है ऐसेआशिक़ को महबूब का दीदार हो जैसेनामालूम ۔पुरतकल्लुफ़ सी महकती वो सुहानी चायअब कहाँ हमको मय...

किताब पर शायरी

किताब पर शायरी

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब हैकहीं एक हसीन सा ख़ाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब हैराजेश रेड्डी۔कोई सूरत किताब से निकलेयाद सूखे गुलाब से निकलेसमीर कबीर۔जब भी कोई किताब लिखूँगातेरे नाम इं...

तिश्नगी/प्यास पर शायरी

तिश्नगी / प्यास पर शायरी

अब तो इतनी भी मयस्सर नहीं मय-ख़ाने मेंजितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने मेंदिवाकर राही बहुत ग़रूर है दरिया को अपने होने परजो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएंराहत इंदौरी पीता हूँ जितनी उतनी ही ब...

प्यास पर शायरी

प्यास पर शायरी

मुझे ये फ़िक्र सबकी प्यास अपनी प्यास है साक़ीतुझे ये ज़िद कि ख़ाली हैमेरा पैमाना बरसों सेमजरूह सुलतानपुरी ऐसी प्यास और ऐसा सब्रदरिया पानी पानी हैविकास शर्मा राज़ नहीं बुझती है प्यास आँसू सें लेकिनकरें...

अखिलेश तिवारी की ग़ज़ल

गुनाह पर शायरी

कोई समझे तो एक बात कहूंइशक़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहींफ़िराक़-गोरखपुरी इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिनदेखे हैं हमने हौसले परवरदिगार केफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ यूं ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैरजैसे कोई गु...

उक़ाब पर शायरी

उक़ाब पर शायरी

उड़ता हुआ उक़ाब तो आँखों में क़ैद हैअब देखिए उक़ाब के आगे कुछ और हैख़ुरशीद तलब उक़ाब उड़ता है जिस तरह आसमानों मेंबुलंदीयों में किया करता हूँ सफ़र तन्हाजावेद जमील हर क़दम कोई दरिन्दा कोई ख़ूँख़ार उक़ाब...