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Hindi Prem Kavita

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

मोहब्बत शायरी

मोहब्बत शायरी

मोहब्बत शायरी उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जायेबशीर बदर और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवाराहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवाफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ रंजि...