कोशिश पर शायरी

कोशिश पर शायरी

कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुनफिर उस के बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश करनिदा फ़ाज़ली और थोड़ा सा बिखर जाऊं , यही ठानी हैज़िंदगी मैंने अभी हार कहाँ मानी हैहसनैन आकिब आख़िरी कोशिश भी करके देखते हैंफिर उसी दर से गुज़र के देखते हैंमनीष शुक्ला शोला हूँ भड़कने की गुज़ारिश नहीं करतासच मुँह …

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