चिराग़ पर शायरी

चिराग़ पर शायरी

जहां रहेगा वहीं रोशनी लुटाएगाकिसी चिराग़ का अपना मकाँ नहीं होतावसीम बरेलवी दया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता हैचले आओ जहां तक रोशनी मालूम होती हैनुशूर वाहिदी दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ सेइस घर को आग लग गई घर के चिराग़ सेमहताब राय ताबां रात तो वक़्त की पाबंद …

चिराग़ पर शायरी Read More »