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Shishir Somvanshi

शिशिर सोमवंशी की कविता

शिशिर सोमवंशी की कविता बीच में अपने एक जंगल थाजिसको पार मुझे करना थाएक नदी भी थी क़िस्मत कीजिस पर पुल मुझको रचना थादिन छोटे थे रात बड़ी थीक्या बतलाऊँ कठिन घड़ी थीफिर भी मैं तुम तक पहुँचा थाजिस दिन हम ...