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Hindi Lost Kavita Best

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

गुमनाम शायरी

गुमनाम शायरी

जब छेड़ती हैं उनको गुमनाम आरज़ूऐंवो मुझको देखते हैं मेरी नज़र बचा केअली जव्वाद ज़ैदी वो एक शख़्स कि गुमनाम था ख़ुदाई मेंतुम्हारे नाम के सदक़े में नामवर ठहराहमीद कौसर जमी है गर्द आँखों में कई गुमनाम बर...