Hindi Kavita about Voice

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह थास्शुरुआत महाभारत थी कुरुक्छेत्र का मैदान था दोनों ओर भाई थे लड़ाई का कारण सत्ता …

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आवाज़ पर शायरी

आवाज़ पर शायरी

आवाज़ दे के देख लो, शायद वो मिल ही जायेवर्ना ये उम्र-भर का सफ़र-ए-राएगाँ तो हैमुनीर नियाज़ी लहजा कि जैसे सुबह की ख़ुशबू अज़ान देजी चाहता है मैं तेरीआवाज़ चूम लूंबशीर बदर बोलते रहना क्योंकि तुम्हारी बातों सेलफ़्ज़ों का ये बहता दरिया अच्छा लगता हैनामालूम ख़ुदा की उसके गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है …

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