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hindi college poetry

स्कूल पर शायरी

स्कूल पर शायरी

भले लगते हैं स्कूलों की यूनीफार्म में बच्चेकंवल के फूल से जैसे भरा तालाब रहता हैमुनव्वर राना इस शहर में कितने चेहरे थे ,कुछ याद नहीं सब भूल गएइक शख़्स किताबों जैसा था ,वो शख़्स ज़बानी याद हुआ मकतब-ए-इ...