Home » gulzar sahab ki shero shayari

gulzar sahab ki shero shayari

सेहत पर शायरी

सेहत पर शायरी

मरीज़-ए-हिज्र को सेहत से अब तो काम नहींअगरचे सुबह को ये बच गया तो शाम नहींरजब अली बेग सरवर۔बज़ाहिर सेहत अच्छी है जो बीमारी ज़्यादा हैइसी ख़ातिर बुढ़ापे में हवस-कारी ज़्यादा हैज़फ़र इक़बाल۔शाह के है ग़...

खुदा पर शायरी

खुदा पर शायरी

वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गयावो पड़ी हैं रोज़ क़यामतें कि ख़्याल-ए-रोज़ जज़ा गयानामालूम ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं मैंने सब लेकिनरहे है ख़ौफ़ मुझे वां की बेनियाज़ी कामीर तक़...

नाव/कश्ती पर शायरी

नाव/कश्ती पर शायरी

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डूबा के देखइक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी हैक़तील शिफ़ाई आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ हैमुम्किन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जायेबह्...