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ghulam ali chupke chupke raat din

ghazal/shairi

अशहद करीम उल्फत की ग़ज़ल

ग़ज़ल ज़िंदगी तेरी जुस्तजू लेकरक्यों भटकता हूं आरज़ू लेकर में जिसे चाहता हूं वह क्या हैक्या करेगा ये चीज़ तू लेकर रात गुजरी है जाग कर मेरीआंखें खुश हैं बहुत लहू लेकर ये कसक ,दुख,तड़प,चुभन मत पूछदिल की...