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ghazal gam bhari

aleena itrat

अलीना इतरत की ग़ज़ल

शाम के वक़्त चिराग़ों सी जलाई हुई मैंघुप अन्धेरों की मुन्डेरों पे सजाई हुई मैं देखने वालों की नज़रों को लगूँ सादा वरक़तेरी तहरीर में हूँ ऐसे छुपाई हुई मैं ख़ाक कर के मुझे सहरा में उड़ाने वालेदेख रक़्स...

ghazal/shairi

अशहद करीम उल्फत की ग़ज़ल

ग़ज़ल ज़िंदगी तेरी जुस्तजू लेकरक्यों भटकता हूं आरज़ू लेकर में जिसे चाहता हूं वह क्या हैक्या करेगा ये चीज़ तू लेकर रात गुजरी है जाग कर मेरीआंखें खुश हैं बहुत लहू लेकर ये कसक ,दुख,तड़प,चुभन मत पूछदिल की...