ghamandi aadmi ke liye shayari

aleena itrat

अलीना इतरत की ग़ज़ल

शाम के वक़्त चिराग़ों सी जलाई हुई मैंघुप अन्धेरों की मुन्डेरों पे सजाई हुई मैं देखने वालों की नज़रों को लगूँ सादा वरक़तेरी तहरीर में हूँ ऐसे छुपाई हुई मैं ख़ाक कर के मुझे सहरा में उड़ाने वालेदेख रक़्साँ हूँ सरे दश्त उड़ाई हुई मैं लोग अफ़साना समझ कर मुझे सुनते ही रहेदर हक़ीक़त हूँ …

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ऊँचाई(बुलंदी)शायरी

ऊँचाई (बुलंदी) शायरी

आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी۔ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहलेख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा किया हैअल्लामा इक़बाल۔ज़रा ये भी तो देखो हँसने वालोकि मैं कितनी बुलंदी से गिरा हूँनूर क़ुरैशी۔ग़ौर से देखो हमें देख के इबरत होगीऐसे …

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