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gham shairi

aleena itrat

अलीना इतरत की ग़ज़ल

शाम के वक़्त चिराग़ों सी जलाई हुई मैंघुप अन्धेरों की मुन्डेरों पे सजाई हुई मैं देखने वालों की नज़रों को लगूँ सादा वरक़तेरी तहरीर में हूँ ऐसे छुपाई हुई मैं ख़ाक कर के मुझे सहरा में उड़ाने वालेदेख रक़्स...

अनाथ और यतीम पर शायरी

अनाथ और यतीम पर शायरी

दीन-ओ-मज़हब बजा सही लेकिनरोने वाला यतीम किस का हैएहसान जाफ़री۔भूके प्यासे मुफ़लिस और यतीम हैं जोनज़रे इनायत उन पर भी कर दे मौलासलीम रज़ा रीवा۔बचा के लाएं किसी भी यतीम बच्चे कोऔर इस के हाथ से तख़लीक़-ए-क...