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flower poetry

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फूल पर शायरी

यहीं कहीं पे मेरे फूल दफ़न हैं प्यारेयहीं कहीं पे हैं नौहे मेरी बहार के भीराना ग़ुलाम मोहिउद्दीन۔ये जो सहरा में खिला फूल, बना है कांटाकिसी तालाब के पानी का कंवल हो जायेअरशद सईद۔भरी बहार में अब बैठ कर ...