father kavita in hindi

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह थास्शुरुआत महाभारत थी कुरुक्छेत्र का मैदान था दोनों ओर भाई थे लड़ाई का कारण सत्ता …

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पिता पर शायरी

पिता पर शायरी

हमें पढ़ाओ ना रिश्तों की कोई और किताबपढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हमनेमेराज आबाद य बेटियां बाप की आँखों में छिपे ख़्वाबको पहचानती हैंऔर कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैंइफ़्तिख़ार आरिफ़ ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँइस पेड़ का साया मरे बच्चों को मिलेगामुनव्वर …

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