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dosti shairi

अदब/आदाब पर शायरी

अदब / आदाब पर शायरी

मुहब्बत के आदाब सीखो ज़राउसे जान कह कर पुकारा करोविकास शर्मा राज़ बन जाऊं ना बेगाना-ए-आदाब-ए-मोहब्बतइतना ना क़रीब आओ, मुनासिब तो यही हैजिगर आबाद य इक तो हमको अदब आदाब ने प्यासा रखाउसपे महफ़िल में सुरा...

बुढ़ापे पर शायरी

बुढ़ापे पर शायरी

बुढ़ापे पर शायरी कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लोटती नहींजा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के लाअबद अलहमेद अदम बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफ़ा करेंबूढ़ों को भी जो मौत ना आए तो क्या करेंअकबर इला आबादी सफ़र पीछे ...