बेवफ़ाई पर शायरी

बेवफ़ाई पर शायरी

इश्क़-ए-रवां की नहर है और हम हैं दोस्तोउस बेवफ़ा का शहर है और हम हैं दोस्तोमुनीर नियाज़ी۔भूलना था तो ये इक़रार किया ही क्यों थाबेवफ़ा तू ने मुझे प्यार किया ही क्यों थानामालूम۔कौन उठाएगा तुम्हारी ये ख़फ़ा मेरे बादयाद की ही बहुत मेरी वफ़ा मेरे बादअमीर मीनाई۔मेरी वफ़ा फ़रेब थी, मेरी वफ़ा पे ख़ाक डालतुझ …

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