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desh prem shairi

इन्क़िलाब शायरी

इन्क़िलाब शायरी

हम अमन चाहते हैं मगर ज़ुलम के ख़िलाफ़गर जंग लाज़िमी है तो फिर जंग ही सहीसाहिर लुधियानवी۔काम है मेरा तग़य्युर नाम है मेरा शबाबमेरा नारा इन्क़िलाब-ओ-इन्क़िलाब-ओ-इन्क़िलाबजोश मलीहाबादी۔और सब भूल गए हर्फ़...