दहेज़ पर शायरी

दहेज़ पर शायरी

देखी जो घर की ग़ुर्बत तो चुपके से मर गईइक बेटी अपने बाप पे एहसान कर गईनदीम भाभा۔जहेज़ मांग रहे हो ग़रूर-ओ-क़हर के साथमुझे कफ़न भी दिला दो , क़लील ज़हर के साथनामालूम۔कहाँ से आई है लोगो, बताओ रस्म-ए-जहेज़ख़ुदा के दीन में इस का कोई सुराग़ नहींनामालूम۔जहेज़ मांग रहे हो, हया नहीं आतीअगर तुम्हें है …

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