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Childhood Hindi Kavita

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

बचपन पर शायरी

बचपन पर शायरी

बच्चों के छोटे हाथों को चांद सितारे छूने दोचार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाऐंगेनिदा फ़ाज़ली उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा मेंफिर लौटके बचपन के ज़माने नहीं आतेबशीर बदर मेरे रोने का जिसमें क़िस...