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busy kavita hindi

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

ghazal/shairi

मसरूफ़ियत पर शायरी

मुहब्बत में कमी आने लगी हैउसे मसरूफ़ियत खाने लगी हैशाहिदा मजीद मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी की हैइस सरज़मीन-ए-दिल पे हुकूमत उसी की हैरिहाना रूही गाह मसरूफ़ियत सुलग उठेगाह तन्हाई-ओ-फ़राग़ जलेअख़तर ज़ि...