bhook par shairi

पानी पर शायरी

पानी पर शायरी

ये समुंद्र ही इजाज़त नहीं देता वर्नामैंने पानी पे तेरे नक़्श बना देने थे۔आँख में पानी रखूँ , होंटों पे चिंगारी रखूँज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखूँराहत इंदौरी۔मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते हैंहंस तालाब पे आते हैं चले जाते हैंअब्बास ताबिश۔एक निशानी ये उसके के गाँव कीहर नलके का पानी मीठा होता …

पानी पर शायरी Read More »

चाय पर शायरी

चाय पर शायरी

हमसे नफ़रत कुछ यूं भी निभाई गईहमारे सामने चाय बना के औरों को पिलाई गईनामालूम۔चाय मेरी ज़िंदगी में लाज़िम है ऐसेआशिक़ को महबूब का दीदार हो जैसेनामालूम ۔पुरतकल्लुफ़ सी महकती वो सुहानी चायअब कहाँ हमको मयस्सर है तुम्हारी चायनामालूम۔फूल, एलबम, शायरी, चायज़ात बिखरी पड़ी है कमरे मेंनामालूम۔ढलती शाम, गहरे सायभीगी आँखें, मैं और चायज़ीशान साजिद …

चाय पर शायरी Read More »

किताब पर शायरी

किताब पर शायरी

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब हैकहीं एक हसीन सा ख़ाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब हैराजेश रेड्डी۔कोई सूरत किताब से निकलेयाद सूखे गुलाब से निकलेसमीर कबीर۔जब भी कोई किताब लिखूँगातेरे नाम इंतिसाब लिखूँगामुईन शादाब۔उसका लहजा किताब जैसा हैऔर वो ख़ुद गुलाब जैसा हैजाज़िब क़ुरैशी۔दर्द की इक किताब है कोईज़िंदगी इज़तिराब …

किताब पर शायरी Read More »

तिश्नगी/प्यास पर शायरी

तिश्नगी / प्यास पर शायरी

अब तो इतनी भी मयस्सर नहीं मय-ख़ाने मेंजितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने मेंदिवाकर राही बहुत ग़रूर है दरिया को अपने होने परजो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएंराहत इंदौरी पीता हूँ जितनी उतनी ही बढ़ती है तिश्नगीसाक़ी ने जैसे प्यास मिला दी शराब मेंनामालूम साक़िया तिश्नगी की ताब नहींज़हर दे दे …

तिश्नगी / प्यास पर शायरी Read More »

प्यास पर शायरी

प्यास पर शायरी

मुझे ये फ़िक्र सबकी प्यास अपनी प्यास है साक़ीतुझे ये ज़िद कि ख़ाली हैमेरा पैमाना बरसों सेमजरूह सुलतानपुरी ऐसी प्यास और ऐसा सब्रदरिया पानी पानी हैविकास शर्मा राज़ नहीं बुझती है प्यास आँसू सें लेकिनकरें क्या अब तो याँ पानी यही हैसिराज औरंगाबादी जिसे भी प्यास बुझानी हो मेरे पास रहेकभी भी अपने लबों से …

प्यास पर शायरी Read More »

अखिलेश तिवारी की ग़ज़ल

गुनाह पर शायरी

कोई समझे तो एक बात कहूंइशक़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहींफ़िराक़-गोरखपुरी इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिनदेखे हैं हमने हौसले परवरदिगार केफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ यूं ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैरजैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैंजिगर मुरादाबादी इस भरोसे पे कर रहा हूँ गुनाहबख़श देना तो तेरी फितरत हैनामालूम मेरे गुनाह ज़्यादा हैं …

गुनाह पर शायरी Read More »

उक़ाब पर शायरी

उक़ाब पर शायरी

उड़ता हुआ उक़ाब तो आँखों में क़ैद हैअब देखिए उक़ाब के आगे कुछ और हैख़ुरशीद तलब उक़ाब उड़ता है जिस तरह आसमानों मेंबुलंदीयों में किया करता हूँ सफ़र तन्हाजावेद जमील हर क़दम कोई दरिन्दा कोई ख़ूँख़ार उक़ाबशहर की गोद में आबाद हैं जंगल कितनेरफ़ीअह शबनम आबिदी कबूतरों पे झपटने की खू कहाँ उनमेंके ये उक़ाब …

उक़ाब पर शायरी Read More »

लालच पर शायरी

लालच पर शायरी

ख़ैरात का मुझे कोई लालच नहीं ज़फ़रमैं इस गली में सिर्फ सदा करने आया हूँज़फ़र इक़बाल अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लीलवो भी हुए ख़राब,मोहब्बत जिन्हों ने कीअहमद मुश्ताक़ लालच के समुंद्र में ईमान की कश्ती हैहर क़ौम ज़माने की ये देख के हँसती हैजिस क़ौम ने भी अपनी तहज़ीब मिटा डालीवो क़ौम ज़माने …

लालच पर शायरी Read More »

नाव/कश्ती पर शायरी

नाव/कश्ती पर शायरी

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डूबा के देखइक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी हैक़तील शिफ़ाई आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ हैमुम्किन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जायेबह्ज़ाद लखनवी मैं कश्ती मैं अकेला तो नहीं हूँमेरे हमराह दरिया जा रहा हैअहमद नदीम क़ासिमी …

नाव/कश्ती पर शायरी Read More »

इल्म पर शायरी

इल्म पर शायरी

मज़हबी बेहस मैंने की ही नहींफ़ालतू अक़ल मुझमें थी ही नहींअकबर इला आबादी ये इलम का सौदा ये रिसाले ये किताबेंइक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैंजां निसार अख़तर इल्म में भी सुरूर है लेकिनये वो जन्नत है जिसमें हूर नहींअल्लामा इक़बाल लफ़्ज़-ओ-मंज़र में मआनी को टटोला ना करोहोश वाले हो तो हर …

इल्म पर शायरी Read More »