खुदा पर शायरी

खुदा पर शायरी

वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गयावो पड़ी हैं रोज़ क़यामतें कि ख़्याल-ए-रोज़ जज़ा गयानामालूम ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं मैंने सब लेकिनरहे है ख़ौफ़ मुझे वां की बेनियाज़ी कामीर तक़ी मीर ख़ुदा से डरते तो ख़ौफ़-ए-ख़ुदा ना करते हमकि याद बुत से हरम में बका ना करते हमक़लक़ मेरठी …

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