पिता पर शायरी

पिता पर शायरी

हमें पढ़ाओ ना रिश्तों की कोई और किताबपढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हमनेमेराज आबाद य बेटियां बाप की आँखों में छिपे ख़्वाबको पहचानती हैंऔर कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैंइफ़्तिख़ार आरिफ़ ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँइस पेड़ का साया मरे बच्चों को मिलेगामुनव्वर …

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