तकिये पर शायरी

तकिये पर शायरी

फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझको रात-भर रखाकभी तकिया इधर रखा कभी तकिया इधर रखाअमीर मीनाई चलो तकिया तुम्हारे ही सिरहानेवगरना रात-भर झगड़ा करोगीदीपक शर्मा दीप गर भरोसा है हमें अब तो भरोसा तेराऔर तकिया है अगर तेरे ही दर का तकियाइंशा-अल्लाह ख़ां इंशा है ये तकिया तरी अताओं परवही इसरार है ख़ताओं परअलताफ़ हुसैन हाली एक …

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